कथा
रामायण का आरंभ एक तड़प से होता है: अयोध्या के राजा दशरथ के पास सब कुछ था, सिवाय एक पुत्र के। राम और उनके भाइयों का जन्म उसी तड़प का उत्तर है।
पुत्रकामेष्टि यज्ञ
गुरु वसिष्ठ के परामर्श से दशरथ ने ऋषि ऋष्यशृंग से पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। ऋष्यशृंग, जिनके पुत्र आगे चलकर राक्षस अलम्बुष हुए, ने अग्नि प्रज्वलित की। अग्नि से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए और पायस का पात्र दिया। दशरथ ने उसे कौसल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांटा।
विष्णु का अवतरण
उसी समय देवताओं ने विष्णु से रावण के वध हेतु मनुष्य रूप में जन्म लेने की प्रार्थना की, क्योंकि अहंकारवश रावण ने मनुष्य से रक्षा नहीं मांगी थी। विष्णु ने स्वीकार किया।
चार राजकुमारों का जन्म
चैत्र शुक्ल नवमी को कौसल्या से राम, कैकेयी से भरत, और सुमित्रा से जुड़वाँ लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। यह दिन राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।
अर्थ और सीख
यह कथा एक पिता की संतान-कामना और संसार की मुक्ति-प्रार्थना को एक कर देती है, यह सिखाते हुए कि ईश्वर सच्ची पुकार पर अवतरित होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दशरथ लंबे समय तक निःसंतान क्यों रहे?
पुत्रकामेष्टि यज्ञ क्या है?
यज्ञ किसने करवाया?
राम का जन्म कब हुआ?
राम के भाई और माताएं कौन थीं?
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, बाल कांड (सर्ग 8-18)
- तुलसीदास कृत रामचरितमानस, बाल कांड
- विकिपीडिया, राम (अक्टूबर 2026)
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