

मारीच ताटका का राक्षस पुत्र है, जो रावण के आदेश पर राम को सीता से दूर ले जाने के लिए स्वर्ण मृग बनता है। मरते हुए वह राम के स्वर में पुकारता है, जिससे लक्ष्मण भी दूर चले जाते हैं।
मारीच कौन थे?
युवावस्था में मारीच ने विश्वामित्र के यज्ञ पर आक्रमण किया और राम के बाण से सौ योजन दूर समुद्र में जा गिरा। भयभीत होकर वह तपस्वी बन गया। रावण के सहायता माँगने पर मारीच विस्तार से चेताता है कि राम अजेय हैं और सीता हरण लंका का नाश करेगा।
मृत्यु की धमकी पाकर मारीच मान जाता है। वह चाँदी के धब्बों और रत्नजटित सींगों वाला मृग बनकर राम को घने वन में ले जाता है और बाण लगने पर मरने से पहले राम के स्वर में सीता और लक्ष्मण को पुकारता है।
वाल्मीकि रामायण में
मारीच 3 कांडों के 15 सर्गों में आते हैं।












