सामग्री पर जाएँ
कथाValmiki Ramayana, Kishkindha Kandaवाल्मीकि रामायण, किष्किंधा कांड

राम और सुग्रीव की मित्रता

सीता की खोज में राम की भेंट हनुमान के माध्यम से निर्वासित वानरराज सुग्रीव से हुई। दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर मित्रता की: राम सुग्रीव को वाली से मुक्त कराएंगे, और सुग्रीव सीता की खोज में सहायता करेंगे।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 27 Oct 2026

कथा

सीता-हरण के बाद राम दक्षिण के वनों में सीता की खोज करते हुए ऋष्यमूक पहुंचे। वहां हनुमान के माध्यम से निर्वासित वानरराज सुग्रीव से मित्रता हुई।

हानि से जुड़ी मित्रता

राम की पत्नी रावण ने और सुग्रीव की पत्नी व राज्य उनके भाई वाली ने छीन लिए थे। अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने एक-दूसरे की सहायता का वचन लिया।

राम ने वचन निभाया

राम ने वाली का वध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया। फिर सुग्रीव ने वानर सेना को सीता की खोज में भेजा, जिससे हनुमान की लंका-छलांग हुई।

अर्थ और सीख

यह कथा सच्ची मित्रता का आदर्श है: हानि से टूटे दो प्राणी एक-दूसरे को उठाते हैं, और वचन निभाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम और सुग्रीव की भेंट कैसे हुई?
ऋष्यमूक पर्वत पर, हनुमान के माध्यम से।
परिचय किसने कराया?
सुग्रीव के मंत्री हनुमान ने।
सुग्रीव को राम की सहायता क्यों चाहिए थी?
वाली ने उनका राज्य और पत्नी छीनकर उन्हें निर्वासित किया था।
सीता का चिह्न क्या था?
सीता द्वारा रावण के विमान से गिराए आभूषण।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, किष्किंधा कांड
  2. तुलसीदास कृत रामचरितमानस, किष्किंधा कांड
  3. विकिपीडिया, सुग्रीव (अक्टूबर 2026)

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।