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कथाValmiki Ramayana, Kishkindha Kandaवाल्मीकि रामायण, किष्किंधा काण्ड; रामचरितमानस

वाली वध

अपने मित्र सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य लौटाने हेतु राम ने पराक्रमी वाली को छिपकर बाण से मारा। मरते वाली ने न्याय पर प्रश्न उठाया — यह धर्म का एक बड़ा विवाद है।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 24 Oct 2026

इस कथा के पात्र

कथा

वन में मित्रता

सीता की खोज में राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत पहुँचे, जहाँ निर्वासित सुग्रीव रहता था। हनुमान के माध्यम से मित्रता हुई: सुग्रीव सीता की खोज में सहायता करेगा, राम उसे वाली से राज्य दिलाएंगे।

भाइयों का विवाद

वाली लगभग अजेय था — वरदान से सामने आए शत्रु की आधी शक्ति उसे मिल जाती थी। गुफा की गलतफहमी से दोनों भाई शत्रु बन गए थे।

छिपकर चलाया बाण

राम ने सुग्रीव से वाली को द्वंद्व की चुनौती दिलवाई और पेड़ के पीछे से बाण चलाया। मरते वाली ने प्रश्न किया; राम ने उत्तर दिया कि वाली ने भाई का अन्याय किया था और राजधर्म उसे दंड देना था। वाली ने न्याय स्वीकारा और पुत्र अंगद को राम को सौंपा।

अर्थ

वाली-वध आज भी चर्चित है — यह न्याय, राजधर्म और दंड की रीति पर एक सच्चा नैतिक प्रश्न है।

अर्थ और सीख

वाली-वध अच्छे-बुरे की सरल कथा नहीं, न्याय और दंड की रीति पर एक गहरा प्रश्न है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम ने वाली को क्यों मारा?
सुग्रीव को राज्य लौटाने हेतु; वाली ने भाई का अन्याय किया था।
राम ने छिपकर बाण क्यों चलाया?
वाली के वरदान के कारण; राम ने इसे राजधर्म का दंड बताया।
क्या यह न्यायसंगत था?
यह रामायण का बड़ा विवाद है।
वाली का पुत्र कौन था?
अंगद।
वाली का वरदान?
सामने आए शत्रु की आधी शक्ति उसे मिल जाती थी।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, किष्किंधा काण्ड; रामचरितमानस

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