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कथाValmiki Ramayana, Aranya Kandaवाल्मीकि रामायण, अरण्य कांड (सर्ग 17-19)

शूर्पणखा और युद्ध की चिंगारी

वनवास के दौरान पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा राम पर मोहित हो गई। अस्वीकृत होकर उसने सीता पर आक्रमण किया, और लक्ष्मण ने उसकी नाक-कान काट दिए। प्रतिशोध हेतु उसने खर-दूषण और फिर रावण को भड़काया, और पूरा युद्ध आरंभ हुआ।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 27 Oct 2026

कथा

रामायण का महायुद्ध सेनाओं से नहीं, बल्कि पंचवटी के वन में एक भेंट से आरंभ हुआ, जब रावण की बहन शूर्पणखा राम के समक्ष आई।

अस्वीकार और अपमान

राम पर मोहित होकर शूर्पणखा ने विवाह का प्रस्ताव रखा। राम ने उसे लक्ष्मण की ओर मोड़ा, और अपमानित होकर उसने सीता पर आक्रमण किया।

नाक-कान का छेदन

सीता की रक्षा हेतु लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक-कान काट दिए। अपमानित होकर वह प्रतिशोध की आग लिए भागी।

चिंगारी से अग्नि

खर-दूषण राम से युद्ध में मारे गए। फिर वह रावण के पास गई और सीता के सौंदर्य का वर्णन कर उसे भड़काया। इसी से सीता-हरण और अंततः रावण का वध हुआ।

अर्थ और सीख

कथा दिखाती है कि बड़े विनाश छोटे क्षणों से जन्मते हैं: अनियंत्रित कामना, आहत अहंकार और प्रतिशोध एक हृदय से पूरे राज्य तक फैल जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शूर्पणखा कौन थी?
रावण की बहन, एक राक्षसी, जो पंचवटी में राम पर मोहित हुई।
लक्ष्मण ने उसकी नाक क्यों काटी?
अस्वीकृत होकर उसने सीता पर आक्रमण किया, तब सीता की रक्षा हेतु लक्ष्मण ने उसकी नाक-कान काट दिए।
वह रावण के पास क्यों गई?
प्रतिशोध हेतु, और सीता के सौंदर्य का वर्णन करके रावण को भड़काने।
उसने युद्ध कैसे आरंभ कराया?
उसकी शिकायत से खर-दूषण मारे गए और रावण ने सीता-हरण का निश्चय किया।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, अरण्य कांड (सर्ग 17-19)
  2. तुलसीदास कृत रामचरितमानस, अरण्य कांड
  3. विकिपीडिया, शूर्पणखा (अक्टूबर 2026)

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