कथा
रामायण के उत्तर कांड में राम की उन दो पुत्रों से भेंट होती है जिन्हें वे जानते तक न थे। सीता के जुड़वाँ पुत्र लव और कुश ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में पले।
आश्रम के बालक
वाल्मीकि ने उन्हें वेद, अस्त्र-विद्या और संपूर्ण रामायण सिखाई, जिसे वे यह जाने बिना गाते थे कि वह उन्हीं की कथा है।
अश्वमेध का घोड़ा
राम के अश्वमेध का घोड़ा वाल्मीकि के वन के पास आया। लव-कुश ने उसे पकड़कर बांध लिया।
पिता और पुत्र
शत्रुघ्न, लक्ष्मण और भरत एक-एक कर परास्त हुए, और अंत में राम स्वयं आए। तभी वाल्मीकि और सीता ने सत्य प्रकट किया। वे बालक पहले ही राम की सभा में रामायण गा चुके थे, जैसा लव और कुश की कथा में है।
अर्थ और सीख
यह कथा रामायण का अपने पर लौटना है: पुत्र अपने पिता की कथा उसी कवि से सीखते हैं। इसमें शौर्य और करुणा दोनों हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लव-कुश कौन थे?
लव-कुश राम से कैसे मिले?
अश्वमेध यज्ञ क्या है?
लव-कुश को किसने सिखाया?
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड
- रामचरितमानस तथा परवर्ती रामायण परंपराएं
- विकिपीडिया, लव और कुश (अक्टूबर 2026)
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