

मतंग वे ऋषि हैं जिनका पंपा सरोवर के निकट का आश्रम शबरी का घर बनता है। उनके शाप के कारण वाली ऋष्यमूक पर्वत पर नहीं जा सकते, इसलिए वह सुग्रीव का आश्रय बनता है।
भूमिकाऋषि
किसमें आते हैंरामायण
समूहऋषि और मुनि
राज्यऋषि आश्रम
पहली बारअरण्यकांड, सर्ग 74
सर्गवाल्मीकि रामायण में 2
मतंग कौन थे?
कबंध राम को मतंग के उपवन के बारे में बताता है, जहाँ फूल कभी नहीं मुरझाते। मतंग की भक्त सेविका शबरी गुरु के कहने पर वर्षों से वहाँ राम की प्रतीक्षा कर रही हैं।
बाद में सुग्रीव बताते हैं कि वाली ने दानव दुंदुभि का शरीर मतंग के आश्रम में फेंका था। मतंग ने शाप दिया कि ऋष्यमूक पर पैर रखते ही वाली मर जाएँगे, इसीलिए सुग्रीव वहाँ सुरक्षित रहते हैं।
वाल्मीकि रामायण में
मतंग 2 कांडों के 2 सर्गों में आते हैं।









