कथा
लंका के सभी राक्षस रावण के साथ नहीं थे। उसके धर्मात्मा भाई विभीषण ने कुल से ऊपर धर्म चुना और राम की शरण ली।
अनसुनी सलाह
विभीषण ने बार-बार सीता लौटाने की प्रार्थना की, पर रावण ने उन्हें अपमानित कर सभा से निकाल दिया।
शरणागति
विभीषण चार साथियों सहित राम के शिविर में आए। सुग्रीव को संदेह था, पर हनुमान ने उनका पक्ष लिया। राम ने कहा कि जो एक बार शरण में आए, मैं उसे कभी नहीं त्यागता।
युद्ध से पूर्व राज्याभिषेक
राम ने युद्ध से पहले ही विभीषण को लंका का राजा बना दिया। उनके भेद से इंद्रजित और रावण पराजित हुए, और अंत में विभीषण ने भाई का अंतिम संस्कार किया।
अर्थ और सीख
कथा सिखाती है कि धर्म कुल-संबंध से बड़ा है, और राम की शरणागत-वत्सलता असीम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विभीषण कौन थे?
विभीषण ने रावण को क्यों छोड़ा?
राम ने क्या किया?
शरणागति क्या है?
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड
- तुलसीदास कृत रामचरितमानस, लंका कांड
- विकिपीडिया, विभीषण (अक्टूबर 2026)
पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।