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त्योहारKartik Amavasya, the new moon of the month of Kartik (October-November), the night of Diwali, about twenty days after Vijayadashami.

काली पूजा

काली पूजा (श्यामा पूजा) कार्तिक अमावस्या, यानी दीपावली की रात, देवी काली की आराधना है। जब शेष भारत लक्ष्मी की पूजा करता है, तब बंगाल, असम और ओड़िशा आधी रात उग्र माँ की आराधना करते हैं।

यह क्या है?

कार्तिक अमावस्या (दीपावली) की रात उग्र देवी काली की आराधना, जो विशेषकर बंगाल, असम और ओड़िशा में आधी रात तांत्रिक विधि से की जाती है।

यह क्यों मनाया जाता है?

वर्ष की सबसे अंधेरी रात पर, जब देवी सबसे निकट मानी जाती हैं, श्यामा माँ से रक्षा, साहस और मुक्ति की कामना हेतु।

यह कैसे मनाया जाता है?

  1. 1काली की मृण्मूर्ति की स्थापना
  2. 2लाल जबा, मिष्टान्न, चावल और दाल का अर्पण (कहीं-कहीं मांस या प्रतीकात्मक भेंट)
  3. 3आधी रात (निशीथ) की तांत्रिक पूजा
  4. 4दीप, धूप, शंख और ढाक
  5. 5आधी रात की पूजा के बाद व्रत पारण

काली पूजा देवी काली का महापर्व है, जो कार्तिक अमावस्या की रात, उसी रात मनाया जाता है जब शेष भारत दीपावली के दीप जलाता है। जहाँ अधिकांश देश लक्ष्मी की पूजा करता है, वहीं बंगाल, असम और ओड़िशा उग्र माँ काली की आराधना करते हैं।

आधी रात की पूजा

अधिकांश पूजाओं से भिन्न, काली पूजा आधी रात (निशीथ) को अपने चरम पर पहुंचती है। तांत्रिक विधि से लाल जबा, मिष्टान्न और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है; कहीं-कहीं पशुबलि की परंपरा है, पर अनेक स्थानों पर अब कूष्मांड या गन्ना जैसे प्रतीक चढ़ाए जाते हैं।

काली या लक्ष्मी?

एक ही अमावस्या की रात देवी के दो रूप पूजे जाते हैं: उत्तर-पश्चिम में समृद्धि की लक्ष्मी, और पूर्व में भय-नाशिनी काली। दोनों एक ही महादेवी के रूप हैं। गुजरात में दीपावली से पूर्व 'काली चौदस' मनाई जाती है। इसकी मूल कथा काली और रक्तबीज में है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काली पूजा क्या है?
काली पूजा (श्यामा पूजा) कार्तिक अमावस्या की रात देवी काली की आराधना है, जो मुख्यतः आधी रात को होती है।
काली पूजा कब होती है?
कार्तिक अमावस्या को, दीपावली की रात (अक्टूबर-नवंबर)।
दीपावली की रात काली की पूजा क्यों?
वर्ष की सबसे अंधेरी रात पूर्वी भारत रक्षा और निर्भयता हेतु उग्र माँ की शरण में जाता है।
काली पूजा कैसे होती है?
काली की मूर्ति स्थापना और आधी रात तांत्रिक पूजा, लाल जबा और मिष्टान्न के अर्पण से।
काली पूजा सबसे अधिक कहाँ होती है?
पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और ओड़िशा में; कालीघाट, दक्षिणेश्वर और कामाख्या प्रमुख हैं।

स्रोत

  1. देवी माहात्म्य और शाक्त पुराण
  2. बंगाल की तांत्रिक और मंदिर परंपराएं (कालीघाट, दक्षिणेश्वर)
  3. विकिपीडिया, काली पूजा (अक्टूबर 2026)

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।