

अनसूया कौन थे?
अनसूया का अर्थ है ईर्ष्या रहित। वाल्मीकि कहते हैं कि उनके तप से अकाल में वर्षा हुई और मंदाकिनी बहने लगी। सीता के आने पर अनसूया उन्हें पतिव्रत धर्म सिखाती हैं और उनके उत्तरों से प्रसन्न होती हैं।
वे सीता से उनके जन्म और विवाह की कथा सुनती हैं, और सीता मिथिला के धनुष यज्ञ का वर्णन करती हैं। अनसूया के उपहार सीता के पास रहते हैं, रावण की कैद में भी।
वाल्मीकि रामायण में
अनसूया 1 कांडों के 3 सर्गों में आते हैं।








