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कथा

हनुमान और संजीवनी पर्वत

लंका के युद्ध में जब लक्ष्मण मूर्छित हुए, तब केवल संजीवनी बूटी उन्हें भोर से पहले बचा सकती थी। एक बूटी न पहचान पाने पर हनुमान पूरा पर्वत ही उठा लाए।

1 मिनट में पढ़ें · अद्यतन 23 Oct 2026

इस कथा के पात्र

कथा

लंका के युद्ध में लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गए, और वैद्य ने कहा कि केवल दूर हिमालय की चोटी पर उगने वाली संजीवनी बूटी ही उन्हें भोर से पहले पुनर्जीवित कर सकती है। हनुमान तुरंत उत्तर की ओर उड़ चले। पर्वत पर पहुँचकर जब वे अनेक बूटियों में से उस एक को न पहचान सके, तो पूरी चोटी ही उखाड़कर समय रहते लंका ले आए, और लक्ष्मण के प्राण बच गए। यह कथा हनुमान की भक्ति और संकल्प का महान प्रतीक है।