इस कथा के पात्र
कथा
लंका के युद्ध में लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गए, और वैद्य ने कहा कि केवल दूर हिमालय की चोटी पर उगने वाली संजीवनी बूटी ही उन्हें भोर से पहले पुनर्जीवित कर सकती है। हनुमान तुरंत उत्तर की ओर उड़ चले। पर्वत पर पहुँचकर जब वे अनेक बूटियों में से उस एक को न पहचान सके, तो पूरी चोटी ही उखाड़कर समय रहते लंका ले आए, और लक्ष्मण के प्राण बच गए। यह कथा हनुमान की भक्ति और संकल्प का महान प्रतीक है।









