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कथाUpanishadic and Puranic traditionबृहदारण्यक उपनिषद (तमसो मा ज्योतिर्गमय)

दीपावली पर दीप क्यों जलाते हैं: ज्योति-पर्व का अर्थ

दीपावली ज्योति-पर्व है, पर हम इतने दीप क्यों जलाते हैं? राम के स्वागत से लेकर ज्ञान के आंतरिक दीप और बाँटने से बढ़ने वाले प्रकाश तक — दीये का गहरा अर्थ।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 24 Oct 2026

कथा

प्रकाश से बना पर्व

दीपावली की पहचान अंधेरे में जगमगाती मिट्टी के दीपों की पंक्ति है। नाम — दीपावली — का अर्थ ही है 'दीपों की पंक्ति'। पर हम इतने दीप क्यों जलाते हैं?

शुभ का स्वागत

सबसे प्रसिद्ध कथा में अयोध्यावासियों ने राम को घर लौटते देखने के लिए दीप जलाए। दीप जलाना स्वागत का भाव है — लौटते राजा का, लक्ष्मी का, सुभाग्य और अतिथि का।

अंधकार पर प्रकाश की विजय

गहरे अर्थ में हर दीपावली कथा एक ही है — राम पर रावण, कृष्ण पर नरकासुर, ज्ञान पर अज्ञान की विजय। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' — 'अंधकार से प्रकाश की ओर ले चल' — पांच शब्दों में दीपावली है।

आंतरिक दीप

दीपक स्वयं आत्मा का चित्र है: मिट्टी का शरीर, वृत्तियों का तेल, अहं की बाती और चेतना की ज्योति। दीप जलाना अपने भीतर का दीप जलाने का संकल्प है।

बाँटने वाला प्रकाश

एक दीप दूसरे को जलाकर कुछ नहीं खोता। यही ज्योति-पर्व का अंतिम अर्थ है: आनंद, ज्ञान और समृद्धि बाँटने से बढ़ते हैं।

अर्थ और सीख

एक दीप दूसरे को जलाकर कुछ नहीं खोता। ज्योति-पर्व सिखाता है कि आनंद, ज्ञान और समृद्धि बाँटने से बढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली पर दीप क्यों जलाते हैं?
राम और लक्ष्मी के स्वागत, अंधकार पर प्रकाश की विजय और ज्ञान के आंतरिक दीप के प्रतीक के रूप में।
दीपावली शब्द का अर्थ?
'दीपावली' — दीपों की पंक्ति।
दीया किसका प्रतीक है?
आत्मा का — मिट्टी का शरीर, वृत्ति का तेल, अहं की बाती और चेतना की ज्योति।
रात भर दीप क्यों जलाते हैं?
ताकि प्रकाश कभी पूर्णतः न बुझे और लक्ष्मी का स्वागत बना रहे।
दीपावली के अर्थ से जुड़ी प्रार्थना?
'तमसो मा ज्योतिर्गमय' — उपनिषद से।

स्रोत

  1. बृहदारण्यक उपनिषद (तमसो मा ज्योतिर्गमय)
  2. दीपावली की लोकपरंपरा और दर्शन

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।