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कथाValmiki Ramayana, Yuddha Kandaवाल्मीकि रामायण, युद्ध काण्ड; रामचरितमानस; अध्यात्म रामायण

सीता की अग्नि परीक्षा

युद्ध के बाद सीता ने संसार के समक्ष अपनी पवित्रता सिद्ध करने को अग्नि में प्रवेश किया, और अग्निदेव ने उन्हें अक्षत लौटाया। यह रामायण का सबसे मार्मिक और चर्चित प्रसंग है।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 24 Oct 2026

इस कथा के पात्र

कथा

विजय के बाद

रावण के वध और लंका-विजय के बाद राम का सीता से पुनर्मिलन हुआ। पर आगे जो हुआ — अग्नि परीक्षा — रामायण का सबसे गहन प्रसंग है।

अग्नि-परीक्षा

राम ने, सीता का हृदय जानते हुए भी, सेना के समक्ष कठोर वचन कहे। आहत सीता ने याचना नहीं की; उन्होंने चिता बनवाई और अग्नि को साक्षी मानकर शांत भाव से ज्वाला में प्रवेश किया।

अग्नि ने अक्षत लौटाया

अग्नि ने उन्हें छुआ तक नहीं। स्वयं अग्निदेव ने सीता को अक्षत, तेजोमय लौटाया और घोषित किया कि वे पूर्ण पवित्र हैं। राम ने कहा कि उन्हें कभी संदेह न था — यह संसार की आँखों के लिए था।

अर्थ और विवाद

अग्नि परीक्षा सदियों से पुनर्व्याख्यायित होती रही है। कुछ इसे सीता की अटल पवित्रता का प्रमाण मानते हैं, कुछ इसे कठिन टिप्पणी। जो भी हो, ज्वाला में सीता की गरिमा महाकाव्य का सबसे सशक्त चित्र है।

अर्थ और सीख

ज्वाला में सीता की अडिग गरिमा महाकाव्य का सबसे सशक्त चित्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीता की अग्नि परीक्षा क्या है?
युद्ध के बाद अग्नि में प्रवेश कर पवित्रता सिद्ध करना।
राम ने अग्नि परीक्षा क्यों कही?
संसार के समक्ष सीता का सम्मान सिद्ध करने को।
अग्नि में क्या हुआ?
अग्नि ने सीता को अक्षत लौटाया।
यह प्रसंग विवादित क्यों है?
इसे पवित्रता का प्रमाण और कठिन माँग — दोनों रूपों में पढ़ा जाता है।
इस प्रसंग में सीता क्या दिखाती हैं?
अटल गरिमा।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, युद्ध काण्ड; रामचरितमानस; अध्यात्म रामायण

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।