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कथाValmiki Ramayana, Ayodhya Kandaवाल्मीकि रामायण, अयोध्या कांड (दशरथ का कौसल्या से कथन, सर्ग 63-64)

श्रवण कुमार और दशरथ का शाप

युवावस्था में शब्दभेदी बाण चलाते हुए दशरथ ने घड़े में भरते जल की ध्वनि को हाथी समझ लिया और अंधे वृद्ध दंपति के भक्त पुत्र श्रवण कुमार को मार डाला। शोकग्रस्त पिता ने शाप दिया कि दशरथ भी पुत्र-वियोग में प्राण त्यागेंगे, जो राम के वनवास पर फलीभूत हुआ।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 27 Oct 2026

कथा

राम के वनवास के शोक में राजा दशरथ की मृत्यु संयोग न थी, बल्कि युवावस्था के एक शाप का फल थी।

भक्त पुत्र

श्रवण कुमार अंधे वृद्ध दंपति के एकमात्र पुत्र थे। वृद्धावस्था में माता-पिता की तीर्थ-अभिलाषा पूरी करने हेतु उन्होंने उन्हें कावड़ में बिठाकर कंधे पर यात्रा कराई।

घातक बाण

एक रात श्रवण नदी से जल लाने गए। उसी वन में युवा दशरथ शब्दभेदी बाण का अभ्यास कर रहे थे। घड़े में भरते जल की ध्वनि को हाथी समझकर उन्होंने बाण चलाया, जो श्रवण को जा लगा।

अंतिम इच्छा और शाप

मरते समय श्रवण ने केवल अपने प्यासे माता-पिता की चिंता की और दशरथ से उन्हें जल पहुंचाने को कहा। पुत्र की मृत्यु जानकर अंधे पिता ने दशरथ को शाप दिया कि वे भी पुत्र-वियोग में प्राण त्यागेंगे, और दोनों ने प्राण त्याग दिए।

शाप की पूर्ति

वर्षों बाद जब राम वन गए, तब दशरथ पुत्र-वियोग के शोक में प्राण त्याग बैठे, और वह शाप सच हुआ।

अर्थ और सीख

कथा श्रवण कुमार को मातृ-पितृ भक्ति का आदर्श बनाती है, और कर्म का अटल नियम सिखाती है कि अनजाने में किया गया कर्म भी फल दिए बिना नहीं छोड़ता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रवण कुमार कौन थे?
अंधे वृद्ध दंपति के एकमात्र पुत्र, जो माता-पिता को कावड़ में बिठाकर तीर्थयात्रा कराने की भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं।
श्रवण की मृत्यु कैसे हुई?
शब्दभेदी बाण चलाते दशरथ ने घड़े की ध्वनि को हाथी समझकर बाण चलाया।
श्रवण के पिता ने क्या शाप दिया?
कि दशरथ भी पुत्र-वियोग के शोक में प्राण त्यागेंगे।
शाप कैसे फलीभूत हुआ?
राम के वनवास पर दशरथ की मृत्यु पुत्र-वियोग के शोक से हुई।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, अयोध्या कांड (दशरथ का कौसल्या से कथन, सर्ग 63-64)
  2. तुलसीदास कृत रामचरितमानस
  3. विकिपीडिया, श्रवण (अक्टूबर 2026)

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