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कथाValmiki Ramayana, Sundara Kandaवाल्मीकि रामायण, सुंदर काण्ड; रामचरितमानस (सुंदरकाण्ड)

लंका दहन: हनुमान ने लंका जलाई

रावण के दरबार में बंदी बनाए गए हनुमान की पूंछ में आग लगाई गई, तो उन्होंने उसी आग से सोने की लंका जला दी — रावण के विनाश की ज्वलंत चेतावनी।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 24 Oct 2026

इस कथा के पात्र

कथा

सीता की खोज के बाद

समुद्र लांघकर सीता को अशोक वाटिका में पाकर हनुमान ने उन्हें राम की मुद्रिका दी। लौटने से पहले उन्होंने रावण की नगरी को चेतावनी देने का निश्चय किया।

रावण के दरबार में

हनुमान ने वाटिका उजाड़ी और अनेक योद्धाओं को मारा, तब इंद्रजीत ने ब्रह्मास्त्र से बांधा। रावण के समक्ष हनुमान ने निर्भय होकर सीता को लौटाने की चेतावनी दी। रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवाई।

जलती नगरी

आग लगते ही हनुमान छोटे होकर बंधन से छूटे और विशाल रूप धारण किया। छत से छत कूदते हुए उन्होंने सोने की लंका को भस्म कर दिया — केवल अशोक वाटिका और विभीषण का घर बचा। फिर समुद्र में पूंछ बुझाकर लौटे।

अर्थ

लंका दहन एक मोड़ है — अपमान की आग हनुमान की बुद्धि से रावण के अहंकार को भस्म करने वाली आग बन गई।

अर्थ और सीख

हनुमान को अपमानित करने वाली आग ही रावण के अहंकार को भस्म करने वाली बन गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लंका दहन क्या है?
रामायण का वह प्रसंग जहाँ हनुमान ने पूंछ की आग से लंका जलाई।
हनुमान की पूंछ में आग क्यों लगाई गई?
रावण ने अपमानित करने को; दूत को मारा नहीं जा सकता था।
हनुमान ने लंका कैसे जलाई?
बंधन तोड़कर, विशाल होकर, जलती पूंछ से।
क्या सीता को हानि हुई?
नहीं, अशोक वाटिका बचाई।
लंका दहन किसका संकेत है?
रावण के विनाश का।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, सुंदर काण्ड; रामचरितमानस (सुंदरकाण्ड)

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।