इस कथा के पात्र
कथा
सीता की खोज के बाद
समुद्र लांघकर सीता को अशोक वाटिका में पाकर हनुमान ने उन्हें राम की मुद्रिका दी। लौटने से पहले उन्होंने रावण की नगरी को चेतावनी देने का निश्चय किया।
रावण के दरबार में
हनुमान ने वाटिका उजाड़ी और अनेक योद्धाओं को मारा, तब इंद्रजीत ने ब्रह्मास्त्र से बांधा। रावण के समक्ष हनुमान ने निर्भय होकर सीता को लौटाने की चेतावनी दी। रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवाई।
जलती नगरी
आग लगते ही हनुमान छोटे होकर बंधन से छूटे और विशाल रूप धारण किया। छत से छत कूदते हुए उन्होंने सोने की लंका को भस्म कर दिया — केवल अशोक वाटिका और विभीषण का घर बचा। फिर समुद्र में पूंछ बुझाकर लौटे।
अर्थ
लंका दहन एक मोड़ है — अपमान की आग हनुमान की बुद्धि से रावण के अहंकार को भस्म करने वाली आग बन गई।
अर्थ और सीख
हनुमान को अपमानित करने वाली आग ही रावण के अहंकार को भस्म करने वाली बन गई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लंका दहन क्या है?
हनुमान की पूंछ में आग क्यों लगाई गई?
हनुमान ने लंका कैसे जलाई?
क्या सीता को हानि हुई?
लंका दहन किसका संकेत है?
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, सुंदर काण्ड; रामचरितमानस (सुंदरकाण्ड)
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