कथा
लंका का सबसे भयंकर योद्धा रावण नहीं, उसका पुत्र इंद्रजित (मेघनाद) था, जिसने इंद्र को भी जीता था।
नागपाश
माया से छिपकर इंद्रजित ने नागपाश छोड़ा, जिससे राम और लक्ष्मण सर्पों में बंधकर मूर्छित हो गए।
गरुड़ का आगमन
तभी विष्णु के वाहन गरुड़ आए, और सर्प अपने पुरातन शत्रु को देखकर भाग खड़े हुए। दोनों भाई पुनः तेजस्वी हो उठे।
इंद्रजित का अंत
अंत में विभीषण ने निकुंभिला यज्ञ का भेद बताया, और हनुमान सहित लक्ष्मण ने यज्ञ रोककर घोर युद्ध में इंद्रजित का वध किया।
अर्थ और सीख
कथा सिखाती है कि सबसे बड़ी शक्ति की भी सीमा है; नागपाश बल से नहीं, गरुड़ के (विष्णु की कृपा के) आगमन से टूटा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंद्रजित कौन थे?
नागपाश क्या है?
दोनों भाई कैसे मुक्त हुए?
इंद्रजित का वध कैसे हुआ?
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड
- तुलसीदास कृत रामचरितमानस, लंका कांड
- विकिपीडिया, इंद्रजित (अक्टूबर 2026)
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