

जटायु अरुण के पुत्र और गृध्रराज थे, जो राजा दशरथ के मित्र थे। सीता को बचाने के लिए उन्होंने रावण से युद्ध किया और पंख कटने के बाद श्रीराम को सीता का समाचार देकर प्राण त्यागे। श्रीराम ने स्वयं उनका अंतिम संस्कार किया।
जटायु का परिवार
माता पिता, जीवनसाथी, संतान, भाई बहन और अन्य संबंधी, जैसे वाल्मीकि रामायण और उसकी परंपरा बताती है।




