इस कथा के पात्र
कथा
पर्व का पहला दिन
धनतेरस — धन-त्रयोदशी — दीपावली के पाँच दिनों का आरंभ करता है। 'धन' अर्थात् सम्पदा; यह दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और पुराने को हटाने को समर्पित है।
धन्वंतरि की कथा
धनतेरस धन्वंतरि — देववैद्य और विष्णु के अवतार — को सम्मान देता है, जो समुद्र-मंथन से अमृत-कलश और आयुर्वेद का ज्ञान लेकर प्रकट हुए। उन्होंने आरोग्य और समुद्र का धन दोनों दिए, इसीलिए यह दिन स्वास्थ्य और धन की कामना का दिन बना। एक दूसरी कथा राजा हिम के पुत्र की है, जिसे उसकी बुद्धिमान पत्नी ने द्वार पर सोना और दीप सजाकर मृत्यु से बचाया।
सोना-धातु क्यों खरीदते हैं
धनतेरस पर घर में कुछ नया धातु — सोना, चांदी या बर्तन — लाना शुभ माना जाता है, जो लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक है। संध्या में लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है।
गहरा अर्थ
धनतेरस दो प्रकार की सम्पदा — आरोग्य और ऐश्वर्य — को जोड़ता है। धन्वंतरि का उपहार सोने से पहले औषधि था। यह दिन याद दिलाता है कि पहला धन स्वस्थ शरीर और स्वच्छ मन है।
अर्थ और सीख
धनतेरस आरोग्य और ऐश्वर्य — दो प्रकार की सम्पदा — को जोड़ता है। पहला धन स्वस्थ शरीर और स्वच्छ मन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस क्या है?
धन्वंतरि कौन हैं?
धनतेरस पर सोना क्यों खरीदते हैं?
धनतेरस की संध्या किसकी पूजा?
धनतेरस स्वास्थ्य से क्यों जुड़ा है?
स्रोत
- भागवत और विष्णु पुराण (धन्वंतरि, समुद्र-मंथन)
- लोकपरंपरा
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