इस कथा के पात्र
कथा
प्रतीक्षारत शिला
युवा राम और लक्ष्मण जब संत विश्वामित्र के साथ चले, तो एक सूने आश्रम में शिला सी निश्चल आकृति मिली — यह अहल्या थीं, संत गौतम की पत्नी।
शाप
कथा है कि इंद्र ने गौतम का रूप धरकर अहल्या को छला। भेद खुलने पर क्रुद्ध गौतम ने अहल्या को शिला बनने का शाप दिया, और कहा कि राम के चरण-रज से उसका उद्धार होगा।
राम के स्पर्श से मुक्ति
विश्वामित्र ने राम को कथा सुनाई। जैसे ही राम का चरण शिला से लगा, अहल्या पुनः जीवित हो गईं। गौतम ने उन्हें पुनः स्वीकार किया।
अर्थ
अहल्या का उद्धार कृपा की कथा है: बीते दोष का भार चाहे जितना भारी हो, सच्चे प्रायश्चित और ईश्वर के स्पर्श से मुक्ति मिलती है। अहल्या पंचकन्याओं में गिनी जाती हैं।
अर्थ और सीख
अहल्या का उद्धार कृपा की कथा है — सच्चे प्रायश्चित और ईश्वर-स्पर्श से मुक्ति मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अहल्या कौन थीं?
अहल्या को शाप क्यों मिला?
अहल्या का उद्धार कैसे हुआ?
अहल्या की कथा क्या सिखाती है?
क्या अहल्या पंचकन्या हैं?
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, बाल काण्ड; रामचरितमानस
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