क्षीरसागर से निकली
समुद्र मंथन के समय यह मणि प्रकट होती है और विष्णु इसे ग्रहण करते हैं।


कौस्तुभ मणि भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर सुशोभित दिव्य रत्न है। समुद्र मंथन में लक्ष्मी के साथ यह मणि प्रकट हुई थी। विष्णु पुराण इसे जगत की निर्मल आत्मा का प्रतीक मानता है।
ग्रंथों में इसकी अलग-अलग कथाएँ हैं।
समुद्र मंथन के समय यह मणि प्रकट होती है और विष्णु इसे ग्रहण करते हैं।
पुराण कौस्तुभ को आत्मा, शुद्ध चेतना, बताता है।