सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम, कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
जय देव जय देव॥
Sukhkarta Dukhharta, Varta Vighnachi
Nurvi Purvi Prem, Krupa Jayachi
Sarvangi Sundar, Uti Shendurachi
Kanthi Zalke Mal, Muktaphalanchi
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
Darshanmatre Mankamana Purti
Jai Dev Jai Dev
हे सुख देने वाले, दुख हरने वाले, आप विघ्नों की बात ही मिटा देते हैं। आपकी कृपा से प्रेम पूर्ण होकर उमड़ता है। आपका सारा शरीर सुंदर है, शेंदूर से सुशोभित, और कंठ में मोतियों की माला झलकती है। जय हो, जय हो, हे मंगलमूर्ति; आपके दर्शन मात्र से मनोकामना पूर्ण होती है।