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त्योहारमेष संक्रांति (सूर्य का मेष राशि में प्रवेश)

बैसाखी और विषु

बैसाखी और विषु मेष संक्रांति पर सौर नववर्ष का पर्व हैं: पंजाब में गेहूँ की फसल, केरल में विषुक्कणी, तथा अन्यत्र पुथांडु और बिहू।

अगला: बुधवार, 14 अप्रैल 2027

संक्षेप में

बैसाखी और विषु 2027: बुधवार, 14 अप्रैल 2027 (मेष संक्रांति (सूर्य का मेष राशि में प्रवेश))। 2026 में यह मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को था।

तिथियाँ दिल्ली पंचांग के अनुसार हैं और आपके क्षेत्र में एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, इसलिए मुहूर्त स्थानीय पंचांग से देखें।

बैसाखी 2027 बुधवार, 14 अप्रैल को है, मेष संक्रांति के दिन, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं और सौर नववर्ष आरंभ होता है। देश भर में यही दिन अनेक नामों से मनाया जाता है: पंजाब में बैसाखी, केरल में विषु, तमिलनाडु में पुथांडु, असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में पणा संक्रांति और बंगाल में पोहेला बोशाख (प्रायः एक दिन बाद)। यह फसल का पर्व भी है, नववर्ष भी, और सिखों के लिए खालसा की स्थापना का दिन भी।

बैसाखी और विषु 2027 की तिथि

बैसाखी और विषु 2027 बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को हैं। 2026 में भी ये मंगलवार, 14 अप्रैल को थे। तिथि चंद्रमा नहीं, सूर्य के मेष प्रवेश से तय होती है, इसलिए लगभग हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल को ही आती है।

बैसाखी और विषु क्यों मनाए जाते हैं

मेष संक्रांति सौर वर्ष का आरंभ है और सूर्य को समर्पित है। पंजाब और हरियाणा में यह गेहूँ की फसल का उत्सव है, महीनों की मेहनत के बाद आभार का दिन। 1699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की, इसलिए यह सिख परंपरा का केंद्रीय दिन है।

केरल में विषु का स्वागत विषुक्कणी से होता है, शुभ वस्तुओं की वह झाँकी जिसे सुबह सबसे पहले देखा जाता है और जिसके केंद्र में कृष्ण की मूर्ति होती है। परंपरा कहती है कि विषु पर जो पहले देखें, वैसा ही वर्ष बीतता है, इसलिए परिवार की आँखें चावल, सोना, फल, दर्पण, दीपक और सुनहरे कोन्ना फूलों पर खुलती हैं।

यह दिन कैसे मनाया जाता है

  • पंजाब: मेले, भांगड़ा और गिद्धा, गुरुद्वारों में दर्शन और नगर कीर्तन।
  • केरल (विषु): भोर में विषुक्कणी, बड़ों द्वारा बच्चों को विषु कैनीट्टम (धन का उपहार), विषु सद्य भोज और आतिशबाज़ी।
  • तमिलनाडु (पुथांडु): द्वार पर कोलम और मीठे, खट्टे व कड़वे स्वाद वाली आम पचड़ी।
  • असम (रोंगाली बिहू): बिहू नृत्य और गीत, नए वस्त्र और गमोछा का उपहार।
  • सब जगह: पवित्र स्नान, सूर्य की प्रार्थना और नए वर्ष के आरंभ पर दान।

पर्व का अर्थ

बैसाखी और विषु फसल के आभार और आने वाले समय की आशा के साथ नए वर्ष का स्वागत करते हैं। शुभ वस्तुएँ देखकर और बाँटकर वर्ष शुरू करना समृद्धि और सद्भाव को चुनने का तरीका है। सभी पर्व हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में बैसाखी कब है?
बैसाखी 2027 बुधवार, 14 अप्रैल को, मेष संक्रांति के दिन है।
2027 में विषु कब है?
विषु 2027 भी बुधवार, 14 अप्रैल को है।
विषुक्कणी क्या है?
कृष्ण के सामने चावल, सोना, फल, दीपक, दर्पण और कोन्ना फूलों की वह झाँकी जिसे परिवार विषु की सुबह सबसे पहले देखता है।

स्रोत और आगे पढ़ें

  1. हिंदू त्योहार तिथियाँ 2026 (Samvat पंचांग)
  2. हिंदू त्योहार तिथियाँ 2027 (Samvat पंचांग)

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।

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