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कथाFolk tradition across Indiaक्षेत्रीय रंगोली परंपराएँ (कोलम, मुग्गू, अलपना, मांडणा)

दीपावली पर रंगोली: अर्थ, डिजाइन और परंपरा

द्वार पर रंगोली दीपावली की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है — लक्ष्मी का स्वागत, दहलीज का आशीर्वाद, और माँ से बेटी तक चली आ रही जीवंत लोककला।

1 मिनट में पढ़ें · अपडेट 24 Oct 2026

कथा

दहलीज पर रंग

दीपावली पर दीप जलने से पहले ही कई घर द्वार पर रंगोली से सज जाते हैं — रंगीन चूर्ण, चावल के आटे, फूलों या रेत से फर्श पर बने आकृति-प्रतीक। तमिलनाडु में 'कोलम', आंध्र में 'मुग्गू', बंगाल में 'अलपना' और राजस्थान में 'मांडणा' कहलाती यह भारत की प्राचीनतम लोककलाओं में से एक है।

लक्ष्मी का स्वागत

रंगोली का पहला उद्देश्य स्वागत है। द्वार पर बनी यह लक्ष्मी को सुंदर दहलीज पार करने का निमंत्रण देती है। कमल, लक्ष्मी के चरण-चिह्न, दीया, स्वस्तिक और ज्यामितीय तारे शुभता के प्रतीक हैं।

बनाने में अर्थ

परंपरा में रंगोली चावल के आटे से बनती थी, ताकि चींटी, पक्षी और जीव उसे खा सकें — सजावट में ही सब जीवों की भरणा का भाव। रोज सुबह नई बनती और दिन भर में मिट जाती रंगोली अनित्यता का कोमल पाठ भी है।

दीपावली की रंगोली

दीपावली की रंगोली सबसे विस्तृत और रंगीन होती है: कमल, मोर, दीप-किनारे और बिंदुओं को जोड़ती आकृतियाँ। कई लोग अब फूल-रंगोली और जल पर तैरती रंगोली भी बनाते हैं।

जीवंत परंपरा

रंगोली प्रायः घर की स्त्रियाँ बनाती हैं और यह माँ से बेटी तक पहुँचती है — कला, भक्ति और दैनिक जीवन को जोड़ती एक परंपरा।

अर्थ और सीख

रंगोली कला, भक्ति और दैनिक जीवन को जोड़ती है — घर की साधारण दहलीज को पवित्र के स्वागत योग्य बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रंगोली क्या है?
द्वार पर रंगीन चूर्ण, चावल के आटे, फूल या रेत से बनी फर्श-कला; क्षेत्रों में कोलम, मुग्गू, अलपना या मांडणा।
दीपावली पर रंगोली क्यों बनाते हैं?
सुंदर दहलीज पर लक्ष्मी के स्वागत और शुभता के लिए।
रंगोली के प्रतीक क्या कहते हैं?
कमल, लक्ष्मी के चरण-चिह्न, दीया, स्वस्तिक आदि शुभता और समृद्धि के प्रतीक।
रंगोली चावल के आटे से क्यों बनती थी?
ताकि चींटी, पक्षी और जीव उसे खा सकें।
रंगोली कौन बनाता है?
परंपरा में घर की स्त्रियाँ, माँ से बेटी तक।

स्रोत

  1. क्षेत्रीय रंगोली परंपराएँ (कोलम, मुग्गू, अलपना, मांडणा)
  2. दीपावली लोकपरंपरा

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।