सामग्री पर जाएँ
त्योहारवैशाख शुक्ल चतुर्दशी

नृसिंह जयंती

नृसिंह जयंती विष्णु के नर-सिंह अवतार का पर्व है, जो संध्या के समय खंभे से प्रकट हुए और प्रह्लाद की रक्षा कर हिरण्यकशिपु का अंत किया।

अगला: मंगलवार, 18 मई 2027

संक्षेप में

नृसिंह जयंती 2027: मंगलवार, 18 मई 2027 (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी)। 2026 में यह गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को था।

तिथियाँ दिल्ली पंचांग के अनुसार हैं और आपके क्षेत्र में एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, इसलिए मुहूर्त स्थानीय पंचांग से देखें।

नृसिंह जयंती 2027 मंगलवार, 18 मई को है। वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भक्त विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह का प्राकट्य मनाते हैं, आधे मनुष्य और आधे सिंह, जो संध्या के समय खंभे से प्रकट हुए ताकि बालक भक्त प्रह्लाद की उसके पिता, असुर राज हिरण्यकशिपु से रक्षा करें। वैष्णवों के लिए यह व्रत और पूजा का दिन है, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और अहोबिलम, सिंहाचलम व यादगिरिगुट्टा जैसे नृसिंह मंदिरों में।

नृसिंह जयंती 2027 की तिथि

नृसिंह जयंती 2027 मंगलवार, 18 मई 2027 (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) को है। 2026 में यह गुरुवार, 30 अप्रैल को थी। मुख्य पूजा सूर्यास्त (सायंकाल) में होती है, जो नृसिंह के प्राकट्य की घड़ी है।

नृसिंह और प्रह्लाद की कथा

भागवत पुराण (स्कंध 7) बताता है कि हिरण्यकशिपु ने कठोर तप से ब्रह्मा से वरदान पाया: वह न मनुष्य से मरे न पशु से, न दिन में न रात में, न भीतर न बाहर, न धरती पर न आकाश में, और न किसी शस्त्र से। स्वयं को अमर मानकर उसने भगवान की तरह पूजे जाने की मांग की। पर उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु का भक्त था। हिरण्यकशिपु ने विष, हाथी, पर्वत और अग्नि से बार-बार उसे मारने का प्रयास किया (अग्नि वाला प्रसंग होलिका का है, जिसे होली पर याद किया जाता है), पर हर बार प्रह्लाद बच गया।

अंत में उपहास करते हुए हिरण्यकशिपु ने एक खंभे पर प्रहार किया और पूछा क्या तेरा विष्णु इसमें है। खंभा फटा और नृसिंह प्रकट हुए, न मनुष्य न पशु। गोधूलि के समय, जो न दिन था न रात, महल की दहलीज़ पर, जो न भीतर थी न बाहर, उन्होंने राजा को अपनी गोद में रखा, जो न धरती थी न आकाश, और अपने नखों से उसका अंत किया, जो कोई शस्त्र नहीं थे। वरदान की हर शर्त का मान रहा और प्रह्लाद की आस्था सत्य सिद्ध हुई।

नृसिंह जयंती कैसे मनाई जाती है

  • व्रत: सूर्योदय से व्रत, जो शाम की पूजा के बाद या अगली सुबह खोला जाता है।
  • सायंकाल पूजा: दूध, दही और शहद से नृसिंह का अभिषेक, और पानकम (गुड़ का पानी) व छाछ का भोग।
  • पाठ: नृसिंह कवच, प्रह्लाद की कथा और विष्णु सहस्रनाम।
  • मंदिर: अहोबिलम, सिंहाचलम और अन्य नृसिंह मंदिरों में विशेष उत्सव।

नृसिंह जयंती का अर्थ

नृसिंह दिखाते हैं कि कोई चतुराई क्रूरता की रक्षा नहीं कर सकती, और भगवान सच्ची भक्ति की रक्षा सबसे अनपेक्षित ढंग से करते हैं। सभी पर्व हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।

इस दिन की आरतियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में नृसिंह जयंती कब है?
नृसिंह जयंती 2027 मंगलवार, 18 मई (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) को है।
नृसिंह कौन हैं?
नृसिंह विष्णु के चौथे अवतार हैं, आधे मनुष्य आधे सिंह, जिन्होंने हिरण्यकशिपु का अंत करके प्रह्लाद की रक्षा की।
नृसिंह जयंती की पूजा सूर्यास्त पर क्यों होती है?
परंपरा के अनुसार नृसिंह गोधूलि में प्रकट हुए, जो न दिन था न रात, ताकि वरदान का मान रहे।

स्रोत और आगे पढ़ें

  1. श्रीमद्भागवत पुराण (Vedabase)
  2. हिंदू त्योहार तिथियाँ 2026 (Samvat पंचांग)
  3. हिंदू त्योहार तिथियाँ 2027 (Samvat पंचांग)

पढ़ें हमारी संपादकीय नीति कि शास्त्र, पुराण और लोक परंपरा को कैसे चिह्नित किया जाता है।

आगे पढ़ें

नृसिंह जयंती से जुड़े

एक्सप्लोरर खोलें