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कथा

समुद्र मंथन

समुद्र मंथन क्षीरसागर का महान मंथन है, जिसमें देव और असुर मिलकर अमृत पाने के लिए सागर को मथते हैं। इससे अनेक रत्न, हलाहल विष और अंत में अमृत प्रकट होते हैं।

1 मिनट में पढ़ें · अद्यतन 23 Oct 2026

इस कथा के पात्र

कथा

अपना खोया बल और अमरत्व पाने के लिए देवों और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर को मथने का निश्चय किया। उन्होंने मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाया, जबकि विष्णु ने कच्छप (कूर्म) रूप धारण कर पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला। मंथन से लक्ष्मी, कामधेनु, चंद्रमा सहित अनेक रत्न निकले, और हलाहल विष भी, जिसे सृष्टि की रक्षा हेतु शिव ने पिया। अंत में धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए।

इस कथा के अस्त्र और प्रतीक

इस कथा से जुड़े त्योहार