इस कथा के पात्र
कथा
दीपावली की रात का हृदय
कार्तिक अमावस्या, दीपावली की मुख्य रात, घर स्वच्छ और जगमगाते हुए लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। मान्यता सरल है: लक्ष्मी वहीं आती हैं जहाँ प्रकाश, स्वच्छता और कृतज्ञ हृदय हो।
घर और चौकी की तैयारी
दिन में पूरा घर साफ करें। संध्या में द्वार, खिड़कियों और दीवारों पर दीप जलाएं। एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति (गणेश सदा पहले), जल-कलश, चावल, पुष्प, कुमकुम, दीप, धूप, मिष्ठान और सिक्के/बही-खाता रखें।
पहले गणेश पूजन
दीप और धूप जलाकर पहले गणेश का आवाहन करें, "ओम् गं गणपतये नमः"। पुष्प, दूर्वा और मिष्ठान अर्पित करें।
लक्ष्मी आवाहन और पूजन
हाथ जोड़कर लक्ष्मी का आवाहन करें, "ओम् श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"। जल, कुमकुम, चावल, माला, कमल/लाल पुष्प, मिष्ठान और फल अर्पित करें। कई परिवार इस समय महालक्ष्मी अष्टकम् या श्री सूक्त पढ़ते हैं और बही-खाते की पूजा करते हैं।
आरती से समापन
अंत में ओम जय लक्ष्मी माता गाएं, दीप घुमाएं, सबको आरती दें और प्रसाद बाँटें। रात भर एक दीप जलता छोड़ें।
भाव की बात
पूजा समृद्धि मांगती है, पर इसका गहरा अर्थ कृतज्ञता और संभाल है, स्वच्छ घर, जलता दीप, स्थिर मन। लक्ष्मी वहीं ठहरती हैं जहाँ जो है उसका सम्मान हो।
अर्थ और सीख
लक्ष्मी पूजा समृद्धि की प्रार्थना है जिसका गहरा अर्थ कृतज्ञता और संभाल है, स्वच्छ घर, जलता दीप, स्थिर मन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दीपावली पर घर पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें?
लक्ष्मी से पहले गणेश की पूजा क्यों?
दीपावली का लक्ष्मी मंत्र क्या है?
लक्ष्मी पूजा का समय?
पूजा की चौकी पर क्या हो?
स्रोत
- पारंपरिक दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि
- गीता प्रेस, गोरखपुर
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