वैदिक कथा

वाली वध

अपने मित्र सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य लौटाने हेतु राम ने पराक्रमी वाली को छिपकर बाण से मारा।

वन में मित्रता

सीता की खोज में राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत पहुँचे, जहाँ निर्वासित सुग्रीव रहता था। हनुमान के माध्यम से मित्रता हुई: सुग्रीव सीता की खोज में सहायता करेगा, राम उसे वाली से राज्य दिलाएंगे।

भाइयों का विवाद

वाली लगभग अजेय था, वरदान से सामने आए शत्रु की आधी शक्ति उसे मिल जाती थी। गुफा की गलतफहमी से दोनों भाई शत्रु बन गए थे।

छिपकर चलाया बाण

राम ने सुग्रीव से वाली को द्वंद्व की चुनौती दिलवाई और पेड़ के पीछे से बाण चलाया। मरते वाली ने प्रश्न किया; राम ने उत्तर दिया कि वाली ने भाई का अन्याय किया था और राजधर्म उसे दंड देना था।

अर्थ

वाली-वध आज भी चर्चित है, यह न्याय, राजधर्म और दंड की रीति पर एक सच्चा नैतिक प्रश्न है।

अर्थ और सीख

वाली-वध अच्छे-बुरे की सरल कथा नहीं, न्याय और दंड की रीति पर एक गहरा प्रश्न है।

वैदिक कथा

वाली वध

स्रोतों सहित पूरी कथा, पात्र और अर्थ वैदिक कथा पर।