वैदिक कथा
वनवासी वृद्धा शबरी ने जीवनभर राम की प्रतीक्षा की और उन्हें मीठे बेर अर्पित किए जिन्हें पहले स्वयं चखा।
वन में शबरी रहती थीं, एक वृद्धा वनवासी और राम की भक्त। गुरु मतंग ने कहा था कि एक दिन राम आएंगे। शबरी वर्षों, जीवनभर, प्रतीक्षा करती रहीं।
सीता की खोज में राम और लक्ष्मण उनकी कुटिया आए। शबरी ने बेर लाए, खट्टे न हों, इसलिए हर बेर पहले स्वयं चखा।
नियमों से जूठा भोजन अर्पण योग्य नहीं। लक्ष्मण ठिठके। पर राम ने उन बेरों को प्रेम से खाया और कहा कि ऐसा मीठा फल उन्होंने कभी नहीं चखा, क्योंकि उनमें शुद्ध प्रेम था। उन्होंने शबरी को मुक्ति दी।
शबरी के बेर भक्ति की आधारशिला हैं: प्रभु अर्पण की शुद्धता या जाति नहीं, केवल प्रेम देखते हैं।
प्रभु अर्पण की शुद्धता या जाति नहीं, केवल प्रेम देखते हैं, भक्ति का मार्ग सबके लिए खुला है।
वैदिक कथा
स्रोतों सहित पूरी कथा, पात्र और अर्थ वैदिक कथा पर।