वैदिक कथा

लव-कुश: सीता के पुत्र और पृथ्वी में लीन होना

गर्भवती अवस्था में निर्वासित सीता ने वाल्मीकि के आश्रम में जुड़वाँ पुत्र लव और कुश को पाला।

दूसरा दुख

रामायण का अंतिम काण्ड, उत्तर काण्ड, युद्ध से गहरा शोक कहता है। अग्नि परीक्षा के बाद भी अयोध्या में सीता पर प्रश्न उठते रहे।

वाल्मीकि आश्रम में जुड़वाँ

सीता को संत वाल्मीकि के आश्रम में आश्रय मिला, और वहाँ जुड़वाँ पुत्र लव और कुश जन्मे। वाल्मीकि ने उन्हें शस्त्र, शास्त्र और रामायण गाना सिखाया।

पिता और पुत्र

वर्षों बाद अश्वमेध यज्ञ में लव-कुश, अनजान कि राम उनके पिता हैं, ने यज्ञ का अश्व पकड़ा और सेना को हराया। दरबार में उनका रामायण-गान सुन राम ने अपने पुत्रों को पहचाना।

पृथ्वी में लीन

राम ने पुनः पवित्रता सिद्ध करने को कहा। पर सीता ने धरती माता भूमि को पुकारा: "यदि मैं मन, वचन, कर्म से राम के प्रति सत्य रही हूँ, तो धरती मुझे अपने में ले ले।" धरती फटी, स्वर्ण सिंहासन उठा, और सीता समा गईं।

अर्थ और सीख

रामायण सरल विजय में नहीं, अपने सबसे सच्चे हृदय के मूल्य में समाप्त होता है।

वैदिक कथा

लव-कुश: सीता के पुत्र और पृथ्वी में लीन होना

स्रोतों सहित पूरी कथा, पात्र और अर्थ वैदिक कथा पर।