वैदिक कथा

भाई दूज: यम और यमुना की कथा

दीपावली का अंतिम दिन यम और उनकी बहन यमुना की कथा से भाई-बहन के स्नेह का सम्मान करता है, तिलक, आरती, मिष्ठान और रक्षा के वचन का दिन।

पाँचवाँ और अंतिम दिन

भाई दूज (भाउ बीज या यम द्वितीया) दीपावली के पाँच दिनों का समापन करता है। जैसे रक्षाबंधन सावन में भाई-बहन का पर्व है, वैसे भाई दूज ज्योति-पर्व के अंत में।

यम और यमुना की कथा

सूर्य की संतान थे यम, मृत्यु और धर्म के स्वामी, और यमुना, नदी-देवी। यम के कठिन कर्तव्यों से लंबे समय तक दूर रहीं यमुना अपने भाई को देखना चाहती थीं।

कैसे मनाते हैं

बहनें भाइयों को घर बुलाती हैं, कुमकुम-चावल का तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं, प्रिय भोजन खिलाती हैं और दीर्घायु की कामना करती हैं। भाई उपहार देते हैं और रक्षा का वचन दोहराते हैं।

अर्थ

भाई दूज दीपावली का अंत देवताओं से नहीं, परिवार से करता है, याद दिलाता है कि सबसे मूल्यवान प्रकाश घर का स्नेह है।

अर्थ और सीख

भाई दूज दीपावली का अंत परिवार से करता है, भाई-बहन का जीवनभर का स्नेह ही सबसे मूल्यवान प्रकाश है।

वैदिक कथा

भाई दूज: यम और यमुना की कथा

स्रोतों सहित पूरी कथा, पात्र और अर्थ वैदिक कथा पर।